दोहे …टोपी, नेता और जनता

सत्येंद्र कात्यायन

रचनाकार- सत्येंद्र कात्यायन

विधा- दोहे

टोपी का उपयोग अब, नेता की पहचान।
कुरता भी अब बन गया, नेता जी की शान।।

टोपी हाथी पर चढ़ी, कहीं साइकिल संग।
हाथ हिलाती चल रही, टोपी बनी दबंग।।

नेता मूरख बनाते, जनता को हर बार।
जान बावले बन रहे, देख वोट अधिकार।।

वादों की बातें चली, हाँ सपनों की बात।
दूर दूर पहुँच सपन, बस में रही न बात।।

मोटे मोटे पेट भी, दौड़ लगाते आज।
किस्से और कहानियां, निभा रही है साथ।।

लूटा खूब जनता को, अबहु जनता की बार।
देर सबेर ना कीजिए, मत है एक हथियार।।

🇮🇳👆✍🏻सत्येंद्र कात्यायन

Views 19
Sponsored
Author
सत्येंद्र कात्यायन
Posts 1
Total Views 19
अंशकालिक प्राध्यापक-हिंदी , श्री कुंद कुंद जैन पीजी कॉलेज , खतौली(मुज़फ्फरनगर)
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia