…..दोस्ती …….

रागिनी गर्ग

रचनाकार- रागिनी गर्ग

विधा- लघु कथा

………….दोस्ती ………
मैं तुम्हे चाहता तो बहुत था मगर तुम प्रेम नहीं करती थीं मुझसे आज आखिरकार पता चल ही गया कि तुम अनूप से प्यार करतीं थीं ..अनूप मेरा सबसे अच्छा दोस्त मुझे अपना सबसे बड़ा दुश्मन लगने लगा मैं कोई मौका हाथ से खाली नहीं जाने देता था अनूप को तुम्हारी नजरों से गिराने का ..एक दिन मेरे साथ दुर्घटना घटित हो गयी और में कोमा में चला गया ..तीन महीने बाद कोमा से बाहर आया जब आँख खुली तो देखा तुम और अनूप दोनों मेरे पास बैठे हो ..माँ ने बताया मैं मर गया होता अगर तुम और अनूप मुझे न बचाते तो ..तुम दोंनों ने दिन रात एक करके मेरी बहुत सेवा की थी ….मुझे खुद पर शर्म महसूस होने लगी आज मैं अनूप को गिराते गिराते खुद अपनी ही नजरों में गिर गया था .मैंने अपने सबसे अच्छे दोस्तों के साथ बहुत गलत व्यवहार किया था .मैंने दोंनों के पैर पकड़ लिये और कहा मुझे माफ कर दो हस्पताल में सब मुझे और तुम दोनों को ही देख रहे थे सब सोचते ही रह गये यह माजरा क्या है और तुम दोनों ने मुझे अपने गले लगाकर कहा था दोस्ती में नो सॉरी नो थैंक्स ..उस दिन मुझे महसूस हुआ बड़ा आसान होता है दुश्मन बन जाना ..दोस्त बनकर दोस्ती निभाना बहुत कठिन काम है आज मैं, अनूप और तुम्हारे आगे खुद को बहुत छोटा महसूस कर रहा था …
रागिनी गर्ग
रामपुर यू़.पी.

Sponsored
Views 10
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
रागिनी गर्ग
Posts 30
Total Views 3.5k
मैं रागिनी गर्ग न कोई कवि हूँ न कोई लेखिका एक हाउस वाइफ हूँ| लिखने में मेरी रुचि है| मेरी कोई रचना किसी भी साहित्य में प्रकाशित नहीं है| फेसबुक की पोस्ट पर कमेंट करती रहती थी| लोगों को पसंद आते थे| दोस्तों ने कहा तुम्हें लिखना चाहिए, कोशिश कर रही हूँ|

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia