कुछ मुक्तक -आधार छंद (दोधक)

Dr Archana Gupta

रचनाकार- Dr Archana Gupta

विधा- मुक्तक

बाबुल के मन की बिटिया हूँ
आँचल में लिपटी गुड़िया हूँ
है बदली हर सोच पुरानी
मैं नभ की उड़ती चिड़िया हूँ

बात सभी अपनी कहते हैं
भाव जुड़े उसमें रखते हैं
शब्द प्रयोग करें कम वो जो
सागर, गागर में भरते हैं

सैर करें यदि रोज सवेरे
रोग नहीं तन को फिर घेरे
साफ़ किया मन भी अपना तो
जीवन के सब दूर अँधेरे

बात कभी दिल को चुभ जाती
आँख तभी कितना भर आती
तोल तभी कुछ भी तुम बोलो
ये वरना कड़वाहट लाती

हार यहाँ पर जीत बनाना
रोकर बैठ नहीं तुम जाना
कोशिश ही करते रहना है
मंज़िल को तुमको यदि पाना

मौसम ले मत तू अँगड़ाई
सावन की अब तो रुत छाई
लो खिलके अब फूल बनी ये
देख कली हर यूँ मुसकाई
डॉ अर्चना गुप्ता

Sponsored
Views 84
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr Archana Gupta
Posts 264
Total Views 19.6k
Co-Founder and President, Sahityapedia.com जन्मतिथि- 15 जून शिक्षा- एम एस सी (भौतिक शास्त्र), एम एड (गोल्ड मेडलिस्ट), पी एचडी संप्रति- प्रकाशित कृतियाँ- साझा संकलन गीतिकालोक, अधूरा मुक्तक(काव्य संकलन), विहग प्रीति के (साझा मुक्तक संग्रह), काव्योदय (ग़ज़ल संग्रह)प्रथम एवं द्वितीय प्रमुख पत्र पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia