देश मेरा है बड़ा निराला

Rita Singh

रचनाकार- Rita Singh

विधा- कविता

देश मेरा है बड़ा निराला
हर मजहब को चाहने वाला ,
हिंदू मुस्लिम सिक्ख इसाई
सबको सम हक देने वाला ।
देश मेरा है बड़ा निराला ।।
भेदभाव नहीं करे किसी से
देखे सबको एक नजर से ,
शरण में चाहे जो आए
घर मैं रख ले उन्हें खुशी से ।
आक्रमणकारी या व्यापारी
जिस नियत से जो भी आया ,
दामन फैलाकर इसने अपना
सबको आगे बढ़ अपनाया ।
पिछली सदियों में थे जो मेहमाँ
आजाद देश में अपने हो गए ,
जो संस्कृति के संहारक थे
वो शहंशाह उद्धारक हो गए ।
ऐसा अनूठा देश है मेरा
गैर किसी को न कहता है ,
जो भी इसमें रहने लग जाए
सबको अपना कहता है ।

डॉ रीता
आया नगर,नई दिल्ली- 47

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Rita Singh
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नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

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One comment
  1. समभाव के स्वभाव की यह राष्ट्र प्रेम की रचना बहुकोणीय विधाओं को राष्ट्रीय एकता के सूत्र में बांधती हुई जागृति दे रही है। अच्छी रचना।