“देश मेरा दिव्य पावन धाम है”

Ankita Kulshreshtha

रचनाकार- Ankita Kulshreshtha

विधा- गज़ल/गीतिका

>> देश मेरा दिव्य पावन धाम है
>> गूंजता हर ओर इसका नाम है
>> ~~~~~~
>> जन यहाँ के हैं सरल मन भाव के
>> देखते कण कण में सीताराम है
>> ~~~~~~
>> गाय भी माता हमारी, पूज्य है
>> नाग की पूजा यहाँ पर आम है
>> ~~~~~~
>> मंदिर कहीं मस्जिद कहीं चर्च दिखे
>> सर्व धर्म यहाँ ,भाव का आवाम है
>> ~~~~~~
>> है अनोखी रीति सच्ची प्रीति की
>> हर गली में एक राधा श्याम है

>> शांत सुमधुर है यहाँ वातावरण
>> ईश भी करते यहीं विश्राम है
>> ~~~~~~
>> देश की पहचान परहित भावना
>> है नहीं दुख शोक या संग्राम है
>> ~~~~~~
>> मानती दुनिया हमारा हौंसला
>> अतिथि देवो भव हमारा काम है
>> ~~~~~
>> प्राकृतिक सौंदर्य का है राष्ट्र ये
>> छवि बङी सुंदर बङी अभिराम है
>> ~~~~
>> भारती हैं हम,हमारा भाग्य है
>> प्यार बदले प्यार ये ही दाम है
>> ~~~~•~
>> ••~~~••
अंकिता कुलश्रेष्ठ आगरा

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Ankita Kulshreshtha
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शिक्षा- परास्नातक ( जैव प्रौद्योगिकी ) बी टी सी, निवास स्थान- आगरा, उत्तरप्रदेश, लेखन विधा- कहानी लघुकथा गज़ल गीत गीतिका कविता मुक्तक छंद (दोहा, सोरठ, कुण्डलिया इत्यादि ) हाइकु सदोका वर्ण पिरामिड इत्यादि|

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3 comments
  1. सुंदर प्रस्तुति है .

    मंदिर कहीं मस्जिद कहीं चर्च दिखे
    >> सर्व धर्म यहाँ ,भाव का आवाम है…………इसे ज़रा देख लें.