देश को मत बांटो तुम भाई।

Vindhya Prakash Mishra

रचनाकार- Vindhya Prakash Mishra

विधा- कविता

देश को मत बांटो तुम भाई,
अपने हित साधन हेतु
सब कर रहे लडाई
भिन्न धर्म है भिन्न वेश है,
हम सबका पर एक देश है।
बंटे रहे है मुस्लिम हिंदू सिक्ख ईसाई,
देश को मत बांटो तुम भाई।
हिंसा हल नहीं किसी बात का,
कितनो ने यूँ ही जान गंवाई,
देश को मत बांटो तुम भाई।
एक माँ की हम सब संताने ,
हम सब आपस मे भाई भाई ।
देश को मत बांटो तुम भाई।

Views 20
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Vindhya Prakash Mishra
Posts 62
Total Views 974
Vindhya Prakash Mishra Teacher at Saryu indra mahavidyalaya Sangramgarh pratapgarh up Mo 9198989831

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia