देश के वीरों के लिए

आलोक प्रतापगढ़ी

रचनाकार- आलोक प्रतापगढ़ी

विधा- कविता

मेरी कविता देश के वीरों को समर्पित है।

ना धन चाहिए, ना रतन चाहिए।
हमको, पूरा मेरा वतन चाहिए।।

कट गये जिनके सर, इस वतन के लिए।
ऐसे वीरों का हमको, संग चाहिए।।

माँ के चेहरे पर ना, कोई शिकन चाहिए।
बेटियों की भी आँखें ना, नम चाहिए।।

मिट गये देश के लिए, जो हँसते हुए।
ऐसे देश में हमको, जनम चाहिए।।

ना धन चाहिए, ना रतन चाहिए।
हमको, पूरा मेरा वतन चाहिए।।

कवि: आलोक सिंह प्रतापगढ़ी

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