देश के नाम चार शेर

Onika Setia

रचनाकार- Onika Setia

विधा- शेर

१, ऐ वतन ! मुझे तुम पर नाज़ है ,
की तुम्हारी सर ज़मीं पर अमर शहीदों ने जन्म लिया.
मगर यह भी अफ़सोस की है बात ,
इसी ज़मीं पर गद्दारों ने भी जन्म

२, ऐ फरिश्तों ! तुम क्या सजाओगे अपने जन्नत को ,
हमारे प्यारे वतन को तो अमर शहीदों ने अपने खून से सजाया है .

३, अपनी गरज के लिए तो बहुत आसां है जीना और मर जाना ,
अपने वतन के लिए जो मरे ,सही में वही है जिंदगी .

४, गुलिस्तां में गुलाब जैसा कोई हसीं फूल नहीं होता,
सारी दुनिया में अपने वतन जैसा कोई घर नहीं होता.

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Onika Setia
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नाम -- सौ .ओनिका सेतिआ "अनु' आयु -- ४७ वर्ष , शिक्षा -- स्नातकोत्तर। विधा -- ग़ज़ल, कविता , लेख , शेर ,मुक्तक, लघु-कथा , कहानी इत्यादि . संप्रति- फेसबुक , लिंक्ड-इन , दैनिक जागरण का जागरण -जंक्शन ब्लॉग, स्वयं द्वारा रचित चेतना ब्लॉग , और समय-समय पर पत्र-पत्रिकाओं हेतु लेखन -कार्य , आकाशवाणी इंदौर केंद्र से कविताओं का प्रसारण .

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