देश का बुरा हाल है||

शिवदत्त श्रोत्रिय

रचनाकार- शिवदत्त श्रोत्रिय

विधा- गज़ल/गीतिका

हर किसी की ज़ुबाँ पर बस यही सवाल है
करने वाले कह रहे, देश का बुरा हाल है||

नेता जी की पार्टी मे फेका गया मटन पुलाव
जनता की थाली से आज रूठी हुई दाल है||

राशन के थैले का ख़ालीपन बढ़ने लगा
हर दिन हर पल हर कोई यहाँ बेहाल है||

पैसे ने अपनो को अपनो से दूर कर दिया
ग़रीबी मे छत के नीचे राजू और जमाल है||

आंशु बहा-बहा कर भी थकता कहाँ है वो
ये ग़रीब की अमीर आँखो का कमाल है||

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शिवदत्त श्रोत्रिय
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हिन्दी साहित्य के प्रति रुझान, अपने विचारो की अभिव्यक्ति आप सब को समर्पित करता हूँ| ‎स्नातकोत्तर की उपाधि मौलाना आज़ाद राष्ट्रीय प्रोद्योगिकी संस्थान से प्राप्त की और वर्तमान समय मे सॉफ्टवेर इंजिनियर के पद पर मल्टी नॅशनल कंपनी मे कार्यरत हूँ|| दूरभाष क्रमांक:- 9158680098 ईमेल :- shivshrotriya91@gmail.com

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