देखकर शोहरत मेरी

Sonika Mishra

रचनाकार- Sonika Mishra

विधा- कविता

देखकर शोहरत मेरी
क्यूँ जल रहा है वो
था अभी तक साथ मेरे
क्यूँ अकेला चल रहा है वो

हर रोज कहता था वो
दर्द दिल के सुनाता था
भावना के आंचल में बैठा
रोज आंसू बहाता था
पर आज दूर से ही
क्यूँ हस रहा है वो
देखकर शोहरत मेरी
क्यूँ जल रहा है वो

मेरी खामोशी नहीं पर
बेबाक सा दिल जानता है
दीपक तले है अंधेरा घना
यह उसे पहचानता है
फिर है उदासी को छुपाये
क्यूँ बड़ रहा है वो
देखकर शोहरत मेरी
क्यूँ जल रहा है वो

-सोनिका मिश्रा

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Sonika Mishra
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मेरे शब्द एक प्रहार हैं, न कोई जीत न कोई हार हैं | डूब गए तो सागर है, तैर लिया तो इतिहास हैं ||

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