दृष्टि प्रेम पथ

Ashutosh Jadaun

रचनाकार- Ashutosh Jadaun

विधा- लेख

अक्सर कुछ कुछ सुना है और कुछ कुछ जीवन के अनुभव से जाना है , दृष्टि ही सृष्टि का निर्माण करती है । वही दृष्टि क्या प्रेम पथ पर अडिग पथिक के लिए साधन मात्र नही है । और क्या वही दृष्टि वेर भाव को तजने का स्तोत्र मात्र नही है । स्वयमेव विचार कीजिएगा और जानिएगा ।
सहज दृष्टि करुणा है प्रेम है
मानव मे महामानव का प्रादुर्भाव है ।।

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Ashutosh Jadaun
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स्वागत हैं मेरे जज्बात साज़ गीतों में. कभी जब मैं यूँ ही तन्हा बैठता हूँ ,और अचानक ही पुरानी यादों की बारिशें,मेरे जेहन में बेतरतीब से ख्याल बूँद बनकर, मेरी कलम से कागज़ पे लफ्ज़ उकेरने को मचलने लगती है II

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