दुश्मन नए मिले

Ashok Kumar Raktale

रचनाकार- Ashok Kumar Raktale

विधा- गज़ल/गीतिका

जब छीनने छुडाने के साधन नए मिले
हर मोड़ पर कई-कई सज्जन नए मिले

कुछ दूर तक गई भी न थी राह मुड़ गई
जिस राह पर फूलों भरे गुलशन नए मिले

काँटों से खेलता रहा कैसा जुनून था
उफ़! दोस्तों की शक्ल में दुश्मन नए मिले

जितने भी काटता गया जीवन के फंद वो
उतने ही जिंदगी उसे बंधन नए मिले

अपनों से दूर कर रहा उनका मिज़ाज भी
गलियों से अब जो गाँव की आँगन नए मिले

~ अशोक कुमार रक्ताले.

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Ashok Kumar Raktale
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4 comments
  1. कृपया अंतिम शेर इस तरह पढ़ें

    अपनों से से दूर कर न दे उनका मिज़ाज भी
    गलियों से अब जो गाँव की आँगन नए मिले.