दुनिया खेले खेल

बबीता अग्रवाल #कँवल

रचनाकार- बबीता अग्रवाल #कँवल

विधा- गज़ल/गीतिका

दुनिया खेल खेले यूँ जैसे कि मदारी है
इस जहाँ में लगता है हर कोई जुआरी है

खुशबुओं की आहट है बुलबुलों की चाहत भी
खिल गया गुल देखो हवाओं में खुमारी है

गा रहा मौसम भी , सब परिंदे गाते हैं
महके महके फूलों की हर तरफ क्यारी है

साथ में बहारों के आई रुत न्यारी है
है कहाँ से आई ये बहारों की सवारी है

दूर हो गया सनम मेरा दर्द ये तो भारी है
आज फिर हवाओं मे एक बेक़रारी है

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बबीता अग्रवाल #कँवल
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जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)
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