दुनिया के हर माँ को मेरा नमन।

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- कविता

💓💓💓💓💓💓💓💓
प्रथम स्पर्श, प्रथम आलिंगन,
स्नेहमयी प्रथम माँ की चुम्बन।
माँ लब्ज में छुपा है बचपन,
जिसने दिया है हमको जीवन।
दुनिया के हर माँ को मेरा नमन।

थपकी, लोरी, बाहों का झुलन,
दो अधरों का माथे पे छुअन।
माँ की गोदी, स्नेहिल सुमन,
खुशियों से भरा हुआ है चमन।
दुनिया के हर माँ को मेरा नमन।

माँ का हृदय विशाल गगन,
हर लेती जो दुख-दर्द अगन।
करूणामयी, अमृतमयी नयन,
सुख शांति, निश्चिंतमयी शयन।
दुनिया के हर माँ को मेरा नमन।

कुमकुम, रोली, माथे का चंदन,
देती आशीष, करती नित वंदन।
दिन-रात जागती, करती जतन,
सुन नहीं पाती थी मेरी क्रन्दन।
दुनिया के हर माँ को मेरा नमन।

क्षण में सुलझाती मेरी उलझन,
माँ तुम बिन है एक अधूरापन।
उन अद्भुत पलों का करुँ मनन,
छोटा बच्चा आज भी मेरा मन।
दुनिया के हर माँ को मेरा नमन।
—लक्ष्मी सिंह 💓😊

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लक्ष्मी सिंह
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