दुनिया का चाल-ओ-चलन देख लिया

विनोद कुमार दवे

रचनाकार- विनोद कुमार दवे

विधा- कविता

उस शख़्स की आँखों में बचपन भी था और जवानी भी,

उसकी बातो में ख़ुशी के गीत थे और गम की कहानी भी,

वो तितली के परों पर बैठ कर उड़ान भर गया,
निचे जमीं पर देखा तो मंजर बदल गया,

उसने कोई ख़ता की ही नहीं तो माफ़ क्या करे,
वक़्त ख़ुद गुनहगार है इन्साफ क्या करे,

चलो इसी बहाने उसने दुनिया का चाल-ओ-चलन देख लिया,
शेर की खाल उतर गई, गीदड़ का बदन देख लिया।

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विनोद कुमार दवे
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परिचय - जन्म: १४ नवम्बर १९९० शिक्षा= स्नातकोत्तर (भौतिक विज्ञान एवम् हिंदी), नेट, बी.एड. साहित्य जगत में नव प्रवेश। पत्र पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित।अंतर्जाल पर विभिन्न वेब पत्रिकाओं पर निरन्तर सक्रिय। अध्यापन के क्षेत्र में कार्यरत। मोबाइल=9166280718 ईमेल = davevinod14@gmail.com

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