** दुःख किण सूं कहूं साजना **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- मुक्तक

दुःख किण सूं कहूं साजणा
दिन गिणतां रातां गिणी
सुपणा अब सब रीत गया
आंख्यां सूं ढळ गयो पाणी
प्रीतम थारां पगळ्या निरख
निरख गयो आँखें रो पाणी
ना आसे पासे सुणनियों
म्हारे हिवड़े री पीड़
दिन गिण काढू लीकडली
काढूं कियां अब रातड़ली
सुण तूं अब तो कागला
कद आसी म्हारा पिऊ
सुगन करे तूं सांतरां
अब जल्दी आसी पिऊ
कागा तने रोटी खिलाऊं
जद घर आसी म्हारा पिऊ
नी तो जासी म्हारा जिऊ
कागला साची-साची बतादे
कद आसी म्हारा पिऊ।।
👍मधुप बैरागी

Views 19
Sponsored
Author
भूरचन्द जयपाल
Posts 278
Total Views 3.8k
मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia