दीवानी

MANINDER singh

रचनाकार- MANINDER singh

विधा- कविता

जुदाई तेरी,
मुझे जीने नहीं देती,
यादें तेरी,
मुझे मरने नहीं देती,
ऐ कम्भख्त,
तूने किस मोड़ पर ला छोड़ा,
मेरी मुस्कराहट,
मुझे रोने नहीं देती,
तेरे वादे,
चुभते है शूल बनकर,
ये कैसी,
दुआए दी तूने,
जो कभी पूरी नहीं होती,
लगा दिया तूने,
ये रोग कैसा,
जिसकी कोई दवा नहीं होती,
अपनों में हु,
पर अपनों से दूर हु,
सिवा तेरी यादों के,
किसी और से बात नहीं होती,
तू जहाँ भी रहे,
खुश रहे,
क्योंकि हर किसी के,
हिस्से में वफ़ा नहीं होती,
बहुत हुआ,
रोना धोना,
चल तू ना सही,
कोई और सही,
जिंदगी एक जगह,
ठहर नहीं होती,
गर रोता रहता “मनी”
तेरी यादों में डूबकर,
तो शायद,
आज उसके लफ़्ज़ों की,
दुनिया दीवानी ना होती,

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MANINDER singh
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मनिंदर सिंह "मनी" पिता का नाम- बूटा सिंह पता- दुगरी, लुधियाना, पंजाब. पेशे से मैं एक दूकानदार हूँ | लेखन मेरी रूचि है | जब भी मुझे वक्त मिलता है मैं लिखता हूँ | मशरूफ हूँ मैं अल्फ़ाज़ों की दुनिया में....... cont no-9780533851

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