दीप जलाते हो

कवि कृष्णा बेदर्दी

रचनाकार- कवि कृष्णा बेदर्दी

विधा- गीत

क्यों आस के दिप जलाते हो
तुम क्यों सपनो में आते हो?

एक बूँद की आस नही जब
थक जाते है ढूंढ -ढूंढ जल ,
तपता है मरुस्थल सा जीवन
तब तुम मधु बरसाते हो ।

तुम क्यों सपनो में आते हो
क्यों आस के दीप जलाते हो?

मै बनकर धरा तुमको निहारु
तुम अनंत आकाश से छाए हो
जब जब मुझको प्यास जगी
तुम बादल बन बरस जाते हो

तुम क्यों सपनो में आते हो
क्यों आस के दिप जलाते हो?

Sponsored
Views 2
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
कवि कृष्णा बेदर्दी
Posts 69
Total Views 170
कवि कृष्णा बेदर्दी ( डाक्टर) जन्मतिथि-०७/०७/१९८८ जन्मस्थान- मधुराई (तमिलनाडु) शिक्षा मैट्रिक -विलेपार्ले(मुम्बई) शिक्षा मेडिकल - B.A.M.S.(लन्दन) प्रकाशित पुस्तक- हिन्दी_हमराही,अनुभूति,महक मुसाफिर, तेलुगु, हिन्दी-तेलुगू फिल्मों में गीतकार शौक_ डांस,अभिनय,गिटार,लेखन, नम्बर- +918319898597 Email I'd kavibedardi@gmail.com, Facebook link https://m.facebook.com/Bedardi? Twitter_@kavibedardi

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia