दीदार अधुरा था

Govind Kurmi

रचनाकार- Govind Kurmi

विधा- कविता

हूश्न के द्वार पर देखा, हूश्न जुल्फों में उलझा था!

मिला दिल को सुकूं कि, ऐसा हमने नजारा देखा था!

उसकी भीगी जुल्फों में, आंखें ठहरी दिल खोया था!

हम खोये नीली आंखों में, जब उसने हमको देखा था!

वो पलटी मूं युं बनाकर, अब उसको हमपर शक था!

हम फिदा हुये इस कारीगरी पर, यह उसको भी एहसास था!

ऐसा हुआ था पहली बार, जब हमने उससे कुछ मांगा था!

दो पल और दे ऐसे खुदा, ऐ दीदार अभी अधूरा था!

Sponsored
Views 98
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Govind Kurmi
Posts 38
Total Views 3.3k
गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia
3 comments