दिव्य प्रेम

Brijesh Nayak

रचनाकार- Brijesh Nayak

विधा- मुक्तक

आकर्षणमय प्यार कभी न रुकता, अतिशय शिथिल- दीन है |
सुविधाओं व संसर्गों से प्रकट नेह रोमांच हीन है|
प्रभु के प्रति अनुराग में, जितने निकट ,लगाव उतना उच्च|
"दिव्य प्रेम" में फीकापन न, नित जाग्रत, हर दम नवीन है |

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

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Brijesh Nayak
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा Ex State trainer, ex SPO NYKS UP, Govt of India Ex Teacher AOL1course VVKI "जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक"कृतियाँ प्रकाशित साक्षात्कार, युद्धरत आम आदमी सहित देश के कई प्रतिष्ठित पत्र एवं पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेकों सम्मान एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित,नि.-सुभाष नगर, कोंच सम्पर्क 9455423376whatsaap9956928367
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