“दिवाली यूं मनाते हैं..”

Shri Bhagwan Bawwa

रचनाकार- Shri Bhagwan Bawwa

विधा- मुक्तक

चलों, इस बार दिवाली कुछ यूं मनाते हैं !
किसी भूखे को भर पेट खाना खिलाते हैं !
ठिठुरता रहता है वो सर्द रातों में बेचारा,
उस बुढे के लिए एक रजाई बनवाते हैं !
तेरा घर तो सदा रोशन ही रहता है,दोस्त
आज कहीं अन्धेरे में कोई दिया जलाते है !
-श्रीभगवान बव्वा

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