दिल को सादर करो

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- गीत

प्रीतिमय व्योम बन दिल को सादर करो|
वह सहम जाएगा, ना अनादर करो |

उर सुलह जीत औ नेह-आधार है |
वह जवानी-सुआकर्ष की धार है |
हिय नहीं तो जगत भी निराधार है|
भाव गह किंतु मैली, ना चादर करो|

प्रीतिमय व्योम बन दिल को सादर करो|
वह सहम जाएगा, ना अनादर करो|

उर दुखाना कथानक पुराना हुआ|
अब मिलन का सुसाधन जमाना हुआ|
जग-भँवर में न फँसना जगत क्षार है|
आत्म-धन को धरम-गुरु -सा बादर करो|

प्रीतमय व्योम बन दिल को सादर करो |
वह सहम जाएगा, ना अनादर करो |

दिव्य अंतःकरण शुभ-अमिट प्यार है |
संस्कृति की सुआभा का त्योहार है |
चित्-सु आनंदरूपी सुखाधार है|
दीप्ति पहिचानों व इसका आदर करो|

प्रीतिमय व्योम बन दिल को सादर करो |
वह सहम जाएगा, ना अनादर करो |

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

चित्=आत्मा

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376व्हाट्सआप-9956928367 एवं8787045243

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