दिल है मेरा,धड़कन तू है

Bhupendra Rawat

रचनाकार- Bhupendra Rawat

विधा- गीत

दिल है मेरा,धड़कन तू है
देख मेरे दिल में बस्ती तू है

कैसे दिखाऊ,क्या मैं बताऊ
ऐसी मुझको उलझन क्यों है

दिल है बेचारा ,ये है हारा
कैसी मुश्किल में दिल है

कहाँ कहाँ जाऊ,कैसे मनाऊ
उसके दिल के दरवाजे बंद है

तेरे दर्शन को हम तरसे
नयन भी तेरी राह है तकते

आँखे मेरी टप टप बरसे
जैसे सावन हो बरसों से
जैसे सावन हो बरसों से

मुश्किल है अब लौट के जाना
कैसे कहँ दू उसको बेगाना

दिल है मेरा धड़कन तू है
देख मेरे दिल में बस्ती तू है
देख मेरे दिल में बस्ती तू है

भूपेंद्र रावत
5।08।2017

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Bhupendra Rawat
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M.a, B.ed शौकीन- लिखना, पढ़ना हर्फ़ों से खेलने की आदत हो गयी है पन्नो को जज़बातों की स्याही से रँगने की अब बगावत हो गईं है ।

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