दिल की बात

Rita Yadav

रचनाकार- Rita Yadav

विधा- कविता

दिल की बात जुबां पर आ कर क्यों रह गई ?
कह सकी नहीं जुबांअदाएं सब कुछ कह गई l

लड़खड़ाए जुबान जो कोई बात कहने में ,
बहुत कुछ चल रहा होता है ,चुप उनके रहने में ,

आंखें भी बोलती है हर्ष विषाद की भाषा l
दिख जाती है आंखों में आशा और निराशा ,

कदम जो हमारे डगमगाने लगते हैं l
दिलों का हाल वो भी सुनाने लगते हैं l

पलकें जो झुक जाती है , नजरें मिलाने से ,
शर्म खाती है वे सच्चाई की बाहर आ जाने से l

सर आपके सामने जो कोई उठा नहीं सकता ,
पहले से झुके सर को और कोई झुका नहीं सकताl

सामने आने से आपके जो कतराने लगता है l
दूर होने का आपसे ढूंढने बहाने लगता है l

सुना दिया करो तुम अपने हाल दिल का ,
होता है हल यहां पर हर मुश्किल का l

रीता यादव

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