दिलों में आज भी अपने तिरंगा मुस्कुराता है

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- मुक्तक

2122- 2122- 2122- 212
( 1 )
तू ही सोनी तू ही —–लैला तू ही मेरी हीर है
तू ही मेरे दिल की दुनिया तू मेरी तकदीर है

आरज़ू पहली तू ही और जुस्तजू भी आखिरी
जिसने बांधा है मुझे वो जुल्फ की जंजीर है

( 2 )🌹🌹🌺🌺
दिलों में आज भी अपने तिरंगा मुस्कुराता है
भगत सुखराज वो बल्लभ वो गंगा मुस्कुराता है
—–🌹🌹—-
वो टूटी झोपड़ी में सो सूखी रोटी ही खाकर
जो 'जन गण मन' कोसुनकर वोनंगा मुस्कुराता है
——-🌹🌹—-
बड़े ही शान से कहता भारत आन है अपनी
फलक पे जिस तरह तारों में चंदा मुस्कुराता है
( 3 )
नहीं मिला है मुझे अब भी हमसफर मेरा
अभी तलाश — उसे कर रहा जिगर मेरा
🌺🌺
क़दम हैं मां के जहां — है वहीं ये सर मेरा
उसी की आज दुआ — से चले है घर मेरा
🌹🌹
बहुत हुई थी —- मसर्रत दिया जलाया तो
मुझे ख़बर भी न थी जल रहा था घर मेरा

Views 5
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Pritam Rathaur
Posts 123
Total Views 974
मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia