दिया जलता रहा

NIRA Rani

रचनाकार- NIRA Rani

विधा- कविता

दिया जलता रहा
सचमुच दिया जलता रहा
घनघोर स्याह रात थी
हॉ अमावस की रात थी
वो दिया जलता रहा
शायद उम्मीदो का दिया था
फक्र से जलता रहा
कही किसी मासूम गरीब की दिवाली
अंधेरे मे न बीत जाए
..वो दिया जलता रहा
कहीं कोई बेबस भूखा न से जाए
वो दिया जलता रहा ..
किसी की की ऑखे दर्द मे भीगी न रह जाए
वो दिया जलता रहा
सच ! उम्मीदो का दिया जलता रहा
निरन्तर जलता रहा
अथक जलता रहा
शुभ दीपावली

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NIRA Rani
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साधारण सी ग्रहणी हूं ..इलाहाबाद युनिवर्सिटी से अंग्रेजी मे स्नातक हूं .बस भावनाओ मे भीगे लभ्जो को अल्फाज देने की कोशिश करती हूं ...साहित्यिक परिचय बस इतना की हिन्दी पसंद है..हिन्दी कविता एवं लेख लिखने का प्रयास करती हूं..
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