गुजरा हुआ जमाना

संजय सिंह

रचनाकार- संजय सिंह "सलिल"

विधा- गज़ल/गीतिका

दिनों के बाद गुजरा सामने से आशियाने के l
मिले फिर से कई किस्से मुझे बीते जमाने के ll

मिली सूनी पड़ी कोई हवेली राह तकती सी l
मिले सूखे हुए आंसू समय बीते बहाने के ll

मिला ऋतुराज भी अपनी उमंगों को समेटे साl
कहीं हो ढूंढता जैसे बहाने गुल खिलाने के ll

खड़ा ऊंचा हिमालय सा रहा मैं शीश को ताने l
नदी कल कल धरा पर चाल चलती है लुभाने के ll

चलो छोड़ भी यह गलियां रहा ना कंत का आना l
"सलिल" सब बंद अब ताले जो खुशियों के खजाने के ll

संजय सिंह "सलिल"
प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेशl

Sponsored
Views 85
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
संजय सिंह
Posts 114
Total Views 4.3k
मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच संचालन का शौक है l email-- sanjay6966@gmail.com, whatsapp +917800366532

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia