दास्तां

Govind Kurmi

रचनाकार- Govind Kurmi

विधा- शेर

बचपन में थी मोटी अब वो हूर हो गई ।

चांद भी सरमा जाऐ वो ऐसा नूर हो गई ।

यूँ चली दास्तां हमारी आशिकों में मशहूर हो गई ।

पाकर इश्क हमारा वो भी कुछ मगरूर हो गई ।

हुस्न और इश्क के गुमान में वो यूँ चूर हो गई ।

नजरों तले रहकर भी वो दिल से दूर हो गई ।

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Govind Kurmi
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गौर के शहर में खबर बन गया हूँ । १लड़की के प्यार में शायर बन गया हूँ ।
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