दास्ताँ ऐ दर्द

डॉ सुलक्षणा अहलावत

रचनाकार- डॉ सुलक्षणा अहलावत

विधा- गज़ल/गीतिका

मिलना कभी तुम फुर्सत में हाल ऐ दिल बताएंगे,
जख्म अपने दिल के उस रोज तुम्हें हम दिखाएंगे।

सीने में अपने दर्द का ज्वालामुखी दबा कर बैठे हैं,
कराह उठोगे जब अपने दर्द का अहसास कराएंगे।

मोहब्बत में नहीं चोट खाई हमने यकीं करना तुम,
क्या क्या बीती है दिल पर बारीकी से समझाएंगे।

छला हर रिश्ते ने हमें और छलकर मजाक उड़ाया,
सुनकर कहानी दग़ाबाज़ी की आँखों से आंसू आएंगे।

इसीलिए कहती हूँ अब भरोसा नहीं रहा किसी पर,
शायद ही जिंदगी भर किसी पर भरोसा कर पाएंगे।

दुनिया पढ़ सके दर्द को मेरे और एक सबक ले सके,
इसीलिए 'सुलक्षणा' से दर्द का हर लम्हा लिखवाएंगे।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

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डॉ सुलक्षणा अहलावत
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लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की खुशबु आये। शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ। हरियाणवी लोक गायक श्री रणबीर सिंह बड़वासनी मेरे गुरु हैं। माँ सरस्वती की दयादृष्टि से लेखन में गहन रूचि है।
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