दामिनी का दम जो निकला

sunil soni

रचनाकार- sunil soni

विधा- कविता

जितना दम उतना लड़े
फिर हार मानी चल पड़े ।
दामिनी का दम जो निकला
लोग सारे रो पड़े ।।

फूल अब कोई कहाँ
महफ़ूज है इस बाग में ।
हाल_ए_दिल उसका सुना तो
बागवाँ भी रो पड़े ।।
दामिनी का दम जो निकला लोग सारे…..
इस धरा पर लाई तुमको
गर्भ में जो पाल कर ।
दानवों सी गाज बनकर
तुम उसी पर गिर पड़े ।।
दामिनी का दम जो.निकला लोग सारे…
इंतहा अब हो चुकी है
बेटियों पर जुल्म की ।
ऐसा न हो की वो ये कह दें
अब तो धरती फट पड़े ।।
दामिनी का दम जो.निकला लोग सारे….
छोड़ बिटिया बेबसी को
ये नहीं औजार तेरा ।
बनके दुर्गा और काली
दानवों को तू दले ।।
दामिनी का दम जो निकले लोग सारे..

सुनील सोनी "सागर"
चीचली(म.प्र.)ई

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sunil soni
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जिला नरसिहपुर मध्यप्रदेश के चीचली कस्बे के निवासी नजदीकी ग्राम chhenaakachhaar में शासकीय स्कूल में aadyapak के पद पर कार्यरत । मोबाइल ~9981272637

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