** दर्द सा उठता है धुंआ **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- मुक्तक

दिल में दर्द सा उठता है धुआं

आज तक गैर अपना ना हुआ

करते है हम मालिक से दुआ

कब सुधरेगा राज-राजनेता मुआ

रोज मरते है दे दे ईश्वर की दुआ

आज तक इनको कुछ ना हुआ।।

👍मधुप बैरागी

बंदिशें बहुत है मगर अंगार अल्फाज रखते है

वक्त आने दो साथी तब तक सुलगा के रखते हैं।
👍मधुप बैरागी

बदलना है जमाने को तो सोच को अपनी बदलो

जमाना खुद बदल जायेगा ज़रा सोच के तो देखो
👍मधुप बैरागी

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 9
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
भूरचन्द जयपाल
Posts 303
Total Views 4.6k
मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia