दर्द भरा गीत

मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी

रचनाकार- मुहम्मद आमिर क़मर सन्दीलवी

विधा- गीत

दर्द भरा नग़मा
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बहुत गहरा है ये दरिया इसे तुम पार मत करना
मुहब्बत हो भी जाये तो कभी इज़हार मत करना
:
कोई मजनू बना देगा कोई राँझा बना देगा
कोई तो दिल से खेलेगा तो कोई जान ले लेगा
किसी भी हुस्न वाले पर कभी एतबार मत करना
मुहब्बत हो भी जाये तो कभी इज़हार मत करना
:
लिखा जाये जो अफ़साना तो मेरा नाम लिख देना
मुहब्बत मे हुवा मै भी बहुत बदनाम लिख देना
जो ज़िक्रे बे वफ़ा हो तो ये मेरा मशवरा सुन लो
किताबे बे वफ़ाई मे तुम उसका नाम लिख देना
भरोसा बे वफ़ाओं पे कभी ऐ यार मत करना
मुहब्बत हो भी जाये तो कभी इज़हार मत करना
:
वो इक दिन टूट जायेंगें जो तू सपने सँजोयेगा
ये तूफां इश्क़ का इक दिन तिरी क़श्ती डुबोयेगा
नहीं जो आज ये समझा वो इक दिन खुद ही रोयेगा
मुहब्बत प्यार में अश्क़ों कि वो लड़ियां पिरोयेगा
लगा के दिल किसी से जीना तुम दुश्वार मत करना
मुहब्बत हो भी जाये तो कभी इज़हार मत करना
:
यहां तड़पा हूं जैसे मै कोई तड़पा नहीं होगा
कि मंज़िल सामने होगी मगर रस्ता नहीं होगा
नज़र आती नहीं खुशियां फ़क़त ये ग़म क मेला है
हुवा बर्बाद वो आख़िर ये जिसने खेल खेला है
ये मेरी इल्तिज़ा है तुम किसी से प्यार मत करना
मुहब्बत हो भी जाये तो कभी इज़हार मत करना
:
आमिर क़मर सन्दीलवी

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