दर्द दिल का न जलाओ तुम

बबीता अग्रवाल #कँवल

रचनाकार- बबीता अग्रवाल #कँवल

विधा- गज़ल/गीतिका

दर्द दिल का न जलाओ तुम
अब न मेरे करीब आओ तुम

जख्म मेरा भरा नहीं है अभी
यूँ न सितम ये और ढाओ तुम

परेशां हूं मैं तेरी ही बातों से
और न मुझे अब सताओं तुम

दफ्न है दिल में सफर यादों का
के उसे ना अब सुलगाओं तुम

बेवफ़ाई से तेरी बहुत तड़पी हूं
अब ना और मुझे तड़पाओं तुम

रुलाई न छूट जाये कँवल की
के यहाँ से अब चले जाओ तुम

बबीता अग्रवाल #कँवल

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जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)

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