**दर्द जो कोई कहता नहीं **सिर्फ सहता**

Neeru Mohan

रचनाकार- Neeru Mohan

विधा- मुक्तक

*माँ के न होने का दर्द
एेसा होता है
जो कोई कहता नहीं है
सिर्फ सहना होता है

*यह दर्द तो सिर्फ
वही बता सकता है
जिसने अपनी माँ को खोया है
रोज़ तिल-तिल के मरा
और रो-रो के सोया है

*हे भगवान! तूने क्या
मुझको दिया
जो मेरा था
वह भी तूने
वापस ले लिया

*एक माँ दी थी
जो तूने मुझ को
दुख में सुख में
जो साथ रहती थी मेरे

*इतने साल बीत गए
न देखी सूरत उसकी
न सुनी बोली उसकी मैंने

*क्यों तूने यह सब
मेरे साथ किया
माँ मेरी छीनकर
क्यो मुझे अनाथ किया

*किसको मैं अपना कहूँ
यह सब दुख
किसको सुनाऊँ
कौन है वह
जिसके में गले लगकर
अपना गम भुलाऊँ

*नहीं है कोई दुनिया में ऐसा
जिसको सुनाऊँ
दुख दर्द अपना मैं
एक जो थी माँ मेरी
उसको भी तूने
मुझसे छीन लिया है

*उसको अपनी
दुनिया में बुलाकर
मेरी इस दुनिया को
तूने क्यो उजाड़ दिया
ये सब करके
तुझको क्या हासिल हुआ

*न रो सकी में खुलकर
किसी के सामने
न दर्द अपना कह सकी
किसी को अपना बनाकर

*मतलबी है यह दुनिया
मतलबी है लोग यहाँ के
जिसको समझो अपना
वही दे जाता है गम
पराया बना के

*हे माँ !तू कहाँ चली गई
मुझको इस अंधेरी
दुनिया में छोड़कर
किससे कहूँ मैं अपना
दुख दर्द उसके
कंधे पर होकर के

*तुम ही तो थी
जिसको बताती थी
मैं अपनी हर बात
और सुनाती थी
अपने दिल का हर हाल

*जिस दिन से तू गई है
इस लोक से उस लोक
रो-रो कर हर दिन
काटा है मैंने अपना हर रोज

*माँ तेरी कमी मुझे आज
हर पल महसूस होती है
तू नहीं है आज मेरे पास
हर रोज तेरी कमी
मुझे बहुत खलती है

*यह लिख रही हूँ
मगर आज भी मेरी आँखों में
बहुत आँसू है
किससे कहूँ मैं
अपने दिल की हर बात
रोज तेरे बिन में
यूँ ही तड़पती हूँ

*शिकायत मुझे सिर्फ
उस भगवान से ही है
जिसने आज अकेला
मुझे इस दुनिया में छोड़ा है
कोई नहीं है मेरा यहाँ
सिर्फ तेरी यादों का बसेरा है

*तेरे बिना यह सब कुछ
पराया सा लगता है
तू नहीं है तभी तो यह जग
बेगाना सा लगता है

*कहाँ चली गई तू मेरी माँ
ज़रा भी नहीं सोचा तूने
बिन तेरे जीएगी
तेरी बेटी यहाँ कैसे

*हे ईश्वर किसी बच्चे को
उसकी माँ से न जुदा करना तू
अगर दे माँ
तो कभी वापस
माँ न उसकी लेना तू

****कभी वापस माँ
****न उसकी लेना तू

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Neeru Mohan
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व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र बी एड - हिंदी , सामाजिक विज्ञान एम फिल - हिंदी साहित्य कार्य - शिक्षिका , लेखिका
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