दर्द को हर्फ हर्फ लिखना छोड़ दिया

Ravi Kumar Saini

रचनाकार- Ravi Kumar Saini

विधा- गज़ल/गीतिका

दर्द को हर्फ हर्फ लिखना छोड़ दिया
माथे की सिलवटे पढ़ना छोड़ दिया

बंद हो गई है हिचकिया आना अब
उन्होंने जो याद करना छोड़ दिया

तबीयत बिगड़ जाती पास आने से
अब दिल भी धड़कना छोड़ दिया

ईमान डोल जाता देख हसीना को
ईमान भी अब डोलना छोड़ दिया

पा के चंद खुश्बू मदहोश हो जाते
ये फिजा जो महकना छोड़ दिया

एक रात ना गुजरती बगैर जिसके
उस शख्स ने तड़पना छोड़ दिया

ना रही इश्क में उन दिनो सा प्यार
मन ने भी तो मचलना छोड़ दिया

आँख जवाब दे जाती है हर वक्त
इसने पहले सा रोना छोड़ दिया

कोई एक जगह टिक भी ना सका
रवि भी तो फिसलना छोड़ दिया

#_रवि_कुमार_सैनी

Sponsored
Views 16
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Ravi Kumar Saini
Posts 2
Total Views 31

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia