*दरिया,दोस्ती,तिश्नगी़,खुशी,समंदर,मौजिज़ा,आइना, ज़िंदगी*

Dharmender Arora Musafir

रचनाकार- Dharmender Arora Musafir

विधा- मुक्तक

सुहानी ज़िदगी को तुम कभी दुश्वार मत करना !
न हो मालूम गहराई तो' दरिया पार मत करना !
मुसाफ़िर हौंसला रखना हमेशा ही ज़माने में ,
सजाये दिल ने' जो सपने उन्हें मिस्मार मत करना !

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बड़ा ही सुहाना सफ़र दोस्ती !
दिलों पर करे है असर दोस्ती !
जगत में सभी को ये दे आसरा ,
सदा ही निराला शज़र दोस्ती !
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तिश्नगी आज  दिल में  जगा दीजिए !
ज़िंदगी हौसलों से सजा दीजिए !
डूब जाओ खुशी के समंदर में तुम ,
बात रंजो अलम की भुला दीजिए !

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बात दिल की मेरे मौजिज़ा कर गयी !
ज़िंदगी को है इक आइना कर गयी !
दूर हमसे किए सारे रंजो अलम ,
हर किसी से हमें आश्ना कर गयी !

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ज़िंदगी का सफ़र अब सुहाना हुआ !
दौरे – गर्दिश तो गुज़रा ज़माना  हुआ !
चाँद जलने लगा हमसफ़र से मिरे ,
खूबसूरत दिले -आशियाना हुआ !

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धर्मेन्द्र अरोड़ा "मुसाफ़िर"
(9034376051

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