दरवाजे पर आ गया, लेकर वो बारात!

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- कुण्डलिया

मैने हँसकर एक दिन,उनसे करली बात!
दरवाजे पर आ गया, लेकर वो बारात!
लेकर वो बारात,बना दूल्हा चढ घोडी!
नाचे उसके यार, बना कर सारे जोडी!!
मोबाइल के बोल,लगे कानों को पैने!
टूटा स्वप्न तुरंत, आँख खोली जब मैने!!
रमेश शर्मा.

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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

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