***दरद जिया का ***

Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

* सावन आयो सजनवा ना आयो जी
** लायो बहार संग दुःखवा भी लायो जी।
*** रिमझिम बरसे बदरिया से बुंदियां
**** झरझर बरसे हैं गोरिया के अंसुवा।
***** यूं घुलमिल गए दोनों
****** न पहचाने कोई।
******* कौन सा है अंसुवा
******** और कौन सी है बुंदिया।

—-रंजना माथुर दिनांक 27/06/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
©

Sponsored
Views 64
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Ranjana Mathur
Posts 103
Total Views 3.4k
भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia