थम जाता

डॉ मधु त्रिवेदी

रचनाकार- डॉ मधु त्रिवेदी

विधा- कविता

थम जाता
✍✍✍✍✍

पल वो एक थम जाता तो
हिसाब तेरे चूकता
मैं सब कर देती

पल एक वो थम जाता तो
वर्ष नए को तब मैं
सुधार लेती

पल वो एक थम जाता वर्ष का
याद अपने को मैं बार
बार कर लेती

पल वो एक थम जाता नव वर्ष का
साथ तेरे बीता कल मैं
दोहरा लेती मैं

पल एक थम जाता आखिर दिन का
मुड़ – मुड़ कर देख लेती पीछे
कर लेती इन्तजार

पल वो एक थम जाता तो कर लेती
प्यार दिल भर कर तुमको
अपना बना लेती

पल एक थम जाता है आखिरी दिन का
हर साँस का हिसाब तुझको
दे देती तब हीँ मैं

पल एक वो थम जाता नव वर्ष का
सब तन्हाईयों को दूर कर
मैं लेती संग तेरे

डॉ मधु त्रिवेदी

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