*** त्रिशंकु जिंदगी ***

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

मुसाफ़िर को जाना किधर था

रोका घर के मोह ने उसे था

क्या पता था उसको कब घर

उसका रौंद दिया किसी ने

बन त्रिशंकु अधर जिंदगी में

लटका रहा बीच मझधार यूं

तमाम उम्र घर ना घाट का

ना ऊपरवाले ने पास बुलाया

ना नीचे ने चैन से रहने दिया

ना मिला कोई विश्वामित्र जो

दूसरा स्वर्ग रहने को बना सके

आज भी इस त्रिशंकु जीवन को

जो पार लगा गंतव्य पहुंचा सके

जीवन को जो वार-संवार सके ।।

👍मधुप बैरागी

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 7
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
भूरचन्द जयपाल
Posts 299
Total Views 4.5k
मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia