** त्यौहार अभी नया है **

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

क्या अंदाज-ए-बयां है
त्योंहार अभी नया है
कोई आया कोई गया
बस अपनी तो आज
दिल में जली होली है
कुछ भी कहो आज
होली फिर होली है
अरमानों की निकली
आज फिर डोली है
अपनी तो फिर भी
मीठी मधुर बोली है
आपने आज फिर
मिश्री -सी घोली है
शायद जुबां ने फिर
हैप्पी होली बोली है
रंगो से रंगीली होली
आपको सपरिवार
मुबारक मुबारक ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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