तेरी याद सदा आती है

राष्ट्रकवि आलोक पान्डेय

रचनाकार- राष्ट्रकवि आलोक पान्डेय

विधा- कविता

तेरी याद सदा आती है….
मुझको तू हरदम भाती है…
रहता हूँ शांत भरोसों से …..
पर विकट व्यथित हूँ झरोखों से…
है बहुत अधीर है वीर ह्रदय
वीरों की धडकन सत्य सदय…
मुझको तू सतत् तडपाती है..
तेरी याद सदा आती है….
हिमालय से टकराती हवाएँ…
कह जाती बहु – बहुत व्यथाएँ
है मौन पडी हर प्रफुल्लित दिशाएँ….
विकृत – संकुचित विविध दशाएँ….
कभी अचानक तू भूल जाती है..
तेरी याद सदा आती है…..
तूझको लगता अब खोना होगा..
पा हर गरल – व्यथा, विभत्स होना होगा…
माँ भारती त्वरित , बुलाती है…
तेरी याद सदा आती है….

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राष्ट्रकवि आलोक पान्डेय
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एक राष्ट्रवादी व्यक्तित्व कवि, लेखक , वैज्ञानिक , दार्शनिक, पर्यावरणविद् एवं पुरातन संस्कृति के संवाहक.....संरक्षक...

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