* तेरी मुस्कुराहट *

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

प्रेम सागर उथला है
थाह कभी आती नहीं ।
इक बार डूबने से
चाह कभी जाती नहीं ।।
*बहुत प्यारी तेरी मुस्कुराहट *
दिल को छू जाती है
ये आँखें शरबती चुपके
से पिला जाती है
दिल में हलचल
मचा देती है
इक कसक सी
छोड़ जाती है
अनजानी चाह
रह जाती है दिल में
दिल तुम्हारे पास ही
रहता है
जिस्मों में दूरी हो
चाहे बहुत
पर दिल
करीब रहता है
मुस्कुराती रहो तुम सदा
मेरी ख़ुशी इसी में है
देखना चाहता हूँ मै तुम्हे
मुस्कुराती रहो हमेशा ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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