तेरी आँखों में है क्या जादू

दुष्यंत कुमार पटेल

रचनाकार- दुष्यंत कुमार पटेल "चित्रांश"

विधा- गीत

तेरी आँखों में है क्या जादू
तेरी बातों में है क्या जादू
मेरा दिल हो जाता है बेकाबू
हर कही तेरी सूरत मैं देखू

मन बादल में छाई हैं यादों की घटा
तू जोबन कली है चंचल है तेरी अदा
कोई करके बहाना आ जाना छत पर
तेरी गलियों की फेरे लगा रहा हूँ
तेरी आँखों …..

असां हुआ मेरा ज़िंदगी का जंग
तुमसे मिलके दुनिया हैं गुलरंग
इतना हक दे बना ले जीवनसाथी
हर डगर में तुझे ढूँढता हूँ
तेरी आँखों …..

कोई शिकायत है तो बेझिझक कह दो
गुमशुम न रहो मेरी जाँ मुस्कुरा दो
तेरा होगा न सामना कभी ग़म से
हर खुशियों से तेरी आंचल भर दू
तेरी आँखों ….

तू चाहत की फूल खिला दे राहों में
सीने से लगा ले ,बसा ले निगाहों में
आज हो जाये एक दिल एक जाँ हम
ज़िंदगी के हर पल तेरी साथ जीयू
तेरी आँखों ….

चाहत की कसमें वादे निभाऊँगा मैं
तेरे दिल को आशियाना बनाऊँगा मैं
तुमबिन जुदा होके न जी पाऊँगा मैं
एक तेरा ही नाम जुंबा में बसा लू
तेरी आँखों ….

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दुष्यंत कुमार पटेल
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नाम- दुष्यंत कुमार पटेल उपनाम- चित्रांश शिक्षा-बी.सी.ए. ,पी.जी.डी.सी.ए. एम.ए हिंदी साहित्य, आई.एम.एस.आई.डी-सी .एच.एन.ए Pursuing - बी.ए. , एम.सी.ए. लेखन - कविता,गीत,ग़ज़ल,हाइकु, मुक्तक आदि My personal blog visit This link hindisahityalok.blogspot.com

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