तेरा दरबारों को खरीदने वाले आ गए

अजीत कुमार तलवार

रचनाकार- अजीत कुमार तलवार "करूणाकर"

विधा- कविता

हे ऊपर वाले,
सुन दर्द भरे मेरे नाले
जब कर दिया सब कुछ तेरे हवाले
तो क्यों होते हैं अत्याचार
तेरे दरबारों पर रोजाना
करते हैं वह, वह कि देख भाल करने वाले

पैसे कि पूजा होती हे तेरे दरबारों में
लाइन में बाहर , खड़े रहते हैं न जाने
कितने, तुझे मिलने लाचारो में
तेरे दरबार को अपना मालिकाना
हक़ समझ कर , वहां रहने वाले
पंडितों और उनके घर वालो ने !!

आजकल एडवांस बुकिंग होने लगी
है माता रानी के भी दरबारों में
बुकिंग करवाओ, तो पूजा में
शामिल हो जाओ, और तुम्हारी
छवि तब आएगी , चुनिन्दा
टेलेकास्ट करते समाचारों में !!

सोना पहनने को नहीं है आजकल
गरीब और माध्यम वर्ग के परिवारों में
चढ़ावा चढ़ा कर खूब वाहवाही लूट
रहे हैं, दो नंबर का धन कमाने वाले
,टेक्सों कि चोरी कर,अपना बैंक बैलेंस
बढ़ा कर, मंदिरों और खुदा के दरबारों में !!

हे भगवान्, क्या यही है तेरी लीला
जहाँ गरीब पिस रहा देखने को तेरी लीला
तून तो अपरम्पार है, फिर क्यों तेरा
चाहने वाला गरीब लाचार है,
"अजीत" को दर्शन दे न दे, पर उसको
दर्शन दे, जो घंटो से खड़ा , तेरे दरबार है
सुन ले पुकार उसकी, तो माया न होने के
बाद भी, करता वहां तेरा इंतज़ार है !!

अजीत कुमार तलवार
मेरठ

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अजीत कुमार तलवार
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शिक्षा : एम्.ए (राजनीति शास्त्र), दवा कंपनी में एकाउंट्स मेनेजर, पूर्वज : अमृतसर से है, और वर्तमान में मेरठ से हूँ, कविता, शायरी, गायन, चित्रकारी की रूचि है , EMAIL : talwarajit3@gmail.com, talwarajeet19620302@gmail.com. Whatsapp and Contact Number ::: 7599235906

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