तू हार न अभी

Sonika Mishra

रचनाकार- Sonika Mishra

विधा- कविता

तू हार न अभी
छमता को अभी पहचानना है
ख़ामोशी को लगा न गले
तपते सूरज को निहारना है
कर न नीरस मन को
अभी बाकी है कुछ रातें
अभी बाकी है कुछ बाते
अभी बाकी है वो जज़्बा
जो मरता नहीं है
कुछ सपने टूटने से
यह संसार बिखरता नहीं है
हस के चल दे राहों पर
धूमिल पड़ा है जो
आज फिर से उसे सवारना है
तू हार न अभी
छमता को अभी पहचानना है
– सोनिका मिश्रा

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Sonika Mishra
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मेरे शब्द एक प्रहार हैं, न कोई जीत न कोई हार हैं | डूब गए तो सागर है, तैर लिया तो इतिहास हैं ||
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