“तुम ही हो”

Archana Singh

रचनाकार- Archana Singh

विधा- कविता

मेरे जीवन के सुरभित गीत का आगाज तुम ही हो।
मेरी धड़कन में बजते इन सुरों का साज तुम ही हो।
तुम्ही कविता बने मेरी तुम्ही मन भाव बन जागे,
मेरे स्वर से सजे हर गीत की आवाज तुम ही हो।

अर्चना सिंह📝

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Archana Singh
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मैं छंदबद्ध रचनाऐं मुख्यतः दोहा,कुण्डलिया और मुक्तक विधा में लिखती हूँ, मुझे प्रकृति व मानव मन में उमड़ते भावों पर लिखना पसंद है......

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One comment
  1. बहुत ही सुन्दर रचना.बहुत बधाई आपको