“तुम, मुझे याद करके देखना”

Santosh Barmaiya

रचनाकार- Santosh Barmaiya

विधा- गज़ल/गीतिका

बिछड़ी हुई गलियों से, आज फिर गुजर के देखना।
तन्हा ना कहोगे खुदको,आज फिर संवर के देखना।।
हर कदम निशा मिलेंगे मेरे,नज़र साद करके देखना।
पास पाओगे मुझे, ख़ुदा से फरियाद करके देखना।।
तस्वीर मेरी लेकर तुम, बंद कमरे में बैठ जाना।
तस्वीर बात करेगी तुमसे, तुम बात करके देखना।।
रूठते थे हमसे तुम कभी, मनाते थे हम कभी।
आज मनाएगी तस्वीर तुम्हें, तुम रूठ करके देखना।।
खो जाओगे ख्यालो में तुम, तभी हम दस्तक देंगे।
दिल में पाओगे हमें, तुम दिल बेकरार करके
देखना।।
तमाम अधूरे किस्से, बन जाएँगे याद के हिस्से।
बस एक बार तुम, मुझे, याद कर के देखना।।
रचियता
संतोष बरमैया"जय"
09923361761,08889245672

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Santosh Barmaiya
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मेरा नाम- संतोष बरमैया"जय", पिताजी - श्री कौशल किशोर बरमैया,ग्राम- कोदाझिरी,कुरई, सिवनी,म.प्र. का मूल निवासी हूँ। शिक्षा-बी.एस.सी.,एम ए, बी.ऐड,।अध्यापक पद पर कार्यरत हूँ। मेरी रचनाएँ पूर्व में देशबन्धु, एक्स प्रेस,संवाद कुंज, अख़बार तथा पत्रिका मछुआ संदेश, तथा वर्तमान मे नवभारत अखबार में प्रकाशित होती रहती है। मेरी कलम अधिकांश समय प्रेरणा गीत तथा गजल लिखती है। मेरी पसंदीदा रचना "जवानी" l

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