तुम आओ (डॉ. विवेक कुमार)

Dr. Vivek Kumar

रचनाकार- Dr. Vivek Kumar

विधा- कविता

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है नदियाँ सागर की लहरों में
समा जाने के लिए।

तुम आओ इस तरह
आती है जैसे बेचैन व्यक्ति को
किसी की दुआओं के असर से करार।

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है
घटाटोप अँधेरी रात के बाद संभावनाओं कि नई सुबह।

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है
किसी की स्मृतियों की खुशबू
मन प्राण को उत्फुल्ल करने के लिए।

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है माँ की लोरी से
मुन्ने की पलकों में मीठी नींद की झपकियाँ।

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है
वर्षों बाद किसी आत्मीय के आगमन पर अनिवर्चनीय खुशी।

तुम आओ इस तरह
जैसे आती है
फूलों की खुशबू से लबरेज हवा।

प्रतीक्षा में हूँ मैं
सदियों से तुम्हारे आने की…।

तेली पाड़ा मार्ग, दुमका, झारखंड।
(सर्वाधिकार सुरक्षित)

Sponsored
Views 123
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Dr. Vivek Kumar
Posts 10
Total Views 891
नाम : डॉ0 विवेक कुमार शैक्षणिक योग्यता : एम0 ए0 द्वय हिंदी, अर्थशास्त्र, बी0 एड0 हिंदी, पी-एच0 डी0 हिंदी, पीजीडीआऱडी, एडीसीए, यूजीसी नेट। उपलब्धियाँ : कादम्बिनी, अपूर्व्या, बालहंस, चंपक, गुलशन, काव्य-गंगा, हिंदी विद्यापीठ पत्रिका, जर्जर-कश्ती, खनन भारती, पंजाबी-संस्कृति, विवरण पत्रिका, हिंदुस्तान, प्रभात खबर,राँची एक्सप्रेस, दक्षिण समाचार, मुक्त कथन, वनवासी संदेश, प्रिय प्रभात, आदि पत्र-पत्रिकाओं में शताधिक रचनाएँ प्रकाशित। आकाशवाणी केन्द्र, भागलपुर से समय-समय पर रचनाओं का प्रसारण. E-mail - vivekvictor1980@gmail.com

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia