तुम्हें देखे हमको ज़माना हुआ है

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- गज़ल/गीतिका

ग़ज़ल
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वो दर पे नबी के जो आया हुआ है
ग़मों का उसी के सफाया हुआ है
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किसानों की मेहनतकशी है ये प्यारे
पसीना जो चेहरे पे आया हुआ है—-गिरह
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बड़ी होके बेटी तो होगी पराई
जिसे बाजुओं में झुलाया हुआ है
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सनम मान जाओ या हमको बता दो
सबब क्या है जो मुँह फुलाया हुआ है
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मेरे चाँद अब तो निकल आओ बाहर
तुम्हें देखे हमको ज़माना हुआ है
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मेरी मौत ही आखिरी है दवा जब
के अब दर्दे दिल जो पुराना हुआ है
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नहीं झुकने देंगे तिरंगे को हम जो
लहू बन के रग़ में समाया हुआ है
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नहीं जुल्म हमपे करो और "प्रीतम"
ये दिल पहले से ही सताया हुआ है
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प्रीतम राठौर भिनगाई
श्रावस्ती (उ०प्र०)
12/08/2017
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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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